गुलाब रखते थे
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लाबो पे गीत तो आँखो मे ख्वाब रखते थे..
कभी किताबो मे हम भी गुलाब रखते थे ..
कभी किसी का जो होता था इंतेज़ार हमे..
बड़ा ही शाम ओ सहर का हिसाब रखते थे…

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